अप्रैल फूल किस लिए मनाते हैं*5️⃣0️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴


*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
*~_____________________________________~*

*🧮 पोस्ट 50▪️*

*📝 सवाल-;*
*📇 अप्रैल फूल किस लिए मनाते हैं*

*✍️ जवाब-:*
*📇 अप्रैल फूल" यहूदी खास तौर से मनाते हैं इस लिए कि अप्रैल कि पहली तारीख को यहूदियों ने अल्लाह के जलीलुल क़द्र पैगंबर हज़रत ईसा अलैहिलस्सलाम को सताया था और तरह तरह से आप का मज़ाक़ उड़ाया था, सदियां गुज़र जाने के बावजूद भी यहुदी एक दूसरे को बेवकूफ बना कर और मज़ाक़ उड़ा कर इस वाकिया की याद ताज़ा करते हैं इस्लामी नुक़्ता ए नज़र से यह रस्म झूठ बोलना, धोखा देना, दूसरे को अ्ज़ीयत (तकलीफ) पहुंचाना, दुश्मनाने इस्लाम की पैरवी जैसे बदतरीन गुनाहों का मजमूआ है इसलिए शरअन यह नाजायज़ व हराम है कुरआन व हदीस की रौशनी में अप्रैल फूल मनाने के नुक़सनात ज़ेल (नीचे) में दर्ज किए जाते हैं मुलाहिज़ा करें*
*"अप्रैल फूल" ख्वाह मोबाइल फोन के ज़रिआ मनाया जाए या बगैर मोबाइल के सरासर नाजायज़ व हराम है और अगर नियत हो कि अल्लाह के नबी हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम का मज़ाक़ उड़ाया गया था इस लिए हम कर रहे हैं तो यह खुला हुआ कुफ्र है, मगर बंद ए मोमिन पर बिला तहकीक कुफ्र का फ़तवा नही दिया जा सकता अलबत्ता हराम गुनाहे कबीरा ज़रूर है याद रहे कि "अप्रैल फूल" मनाने में छै (6) किस्म के गुनाह सादिर होते हैं (1) अल्लाह के जलीलुल क़द्र पैगंबर हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की शान में तौहीन करना,(2) यहूदो नसारा की पैरवी करना, (3) झूट बोलना,(4) मज़ाक़ उड़ाना,(5) वादा के खिलाफ करना,(6) मुसलमान को ईज़ा (तकलीफ) पहुंचाना*
*(1) इस दिन सरीह झूठ बोलने को लोग जायज़ समझते हैं, झूठ को अगर गुनाह समझकर बोला जाए तो गुनाहे कबीरा है। और अगर उसको हलाल और जायज़ समझ कर बोला जाए तो अंदेशा ए कुफ्र है, झूठ की बुराई और मज़म्मत के लिए यही काफी है कि कुरआन करीम ने لَّعۡنَتَ اللّٰہِ عَلَى الۡكٰذِبِیۡنَ (झूठों पर अल्लाह की लानत डालें) फरमाया है गोया जो लोग अप्रैल फूल मनाते हैं वह कुरआन में मलऊन ठहराए गए हैं और उन पर खुदा ए तआला की लानत हैं*
*(2) इसमें दूसरे को धोखा देना है यह भी गुनाहे कबीरा है। हदीस में है जो शख्स हमें (यानी मुसलमानों को) धोखा दे वह हम में से नहीं* 
📚 मिशकात सफ़ह 503 
*(3) इसमें मुसलमानों को ईज़ा (तकलीफ) पहुंचाना है यह भी गुनाहे कबीरा है कुरआन करीम में है बेशक जिन्होंने ईज़ा दी मुसलमान मर्दों और मुसलमान औरतों को फिर तौबा ना की, उनके लिए जहन्नम का अज़ाब है और उनके लिए आग का अज़ाब*
*(4) अप्रैल फूल मनाना गुमराह और बे दीन क़ौमों की मुशाबिहत है और हुज़ूर का इरशाद है जिस शख्स ने किसी क़ौम की मुशाबिहत की वह उन्हीं में से होगा पस जो लोग फैशन के तौर पर अप्रैल फूल मनाते हैं उनके बासरे में अंदेशा है कि वह कयामत के दिन यहूद व नसारा के सफ़ में उठाए जाएँ जब इतने बड़े गुनाहों का मजमूआ है तो जिस शख्स को अल्लाह तआला ने मामूली अक्ल भी दी हो वह अंग्रेजों की अंधी तक़लीद में उसका इर्तिकाब नहीं कर सकता इसलिए तमाम मुसलमान भाइयों को इस से तौबा करनी चाहिए*

*📚 सूरह आले इमरान आयत 61*
*📚 सूरह बुरूज आयत 10*
*📚 मसाइले शरईय्या जिल्द अव्वल सफ़ह 559*
*📚 अप्रैल फूल मनाना कैसा सफ़ह 14 ता 17*
________________________
________________________
*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*


👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/I3NIYUqgOmvBN2r8fDzqIH

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

क्या अहले-सुन्नत-वल-जमाअत (बरेलवी) का दिगर बदमज़हब, वहाबी, देवबंदी, फिर्कों से सिर्फ़ दरुद, सलाम, फ़ातिहा, का झगड़ा है*4️⃣7️⃣

एक शख़्स कलमा ना पढ़ने के बावुजूद मुसलमान हो गया उसकी क्या सूरत है*4️⃣8️⃣