जो फ़र्ज़ नमाज़ में शरीक़ न हो तो उसके लिए वित्र और तराबीह की जमाअत में शरीक होने का क्या हुक्म है*52
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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_05/09/1444_*
*_रमज़ान मुबारक_*
*_⛅ दिन; मंगल_*
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_28/03/2023_*
*_मार्च_*
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*🧮 पोस्ट 51▪️*
*📝 सवाल :-*
*📇 जो फ़र्ज़ नमाज़ में शरीक़ न हो तो उसके लिए वित्र और तराबीह की जमाअत में शरीक होने का क्या हुक्म है*
*✍️ जवाब -:*
*📇 तरावीह की नमाज़ की कज़ा नहीं है अगर किसी दिन की तरावीह रह गई तो दूसरे दिन उस की क़ज़ा नहीं की जा सकती हां तरावीह का वक़्त इशा की नमाज के बाद से लेकर सुबह सादिक तक है यानि सहरी के वक़्त ख़त्म होने से पहले जब भी पढ़े वह अदा है क़ज़ा नहीं जिसने फर्ज जमाअत से न पढ़े हों वह वित्र की जमाअत में शरीक न हो तनहा पढ़े हां तरावीह की जमाअत में शरीक हो सकता है हज़रत मौलाना मुफ्ती अजमल शाह साहब संभली रहमतुल्लाह तआला अलैह लिखते हैं जिस मस्जिद में नीचे सेहन न हो या कम हो और गर्मी या गर्मी के मौसम में नीचे सख्त गर्मी मालूम होती हो और छत पर ऐसी चहार दीवारी हो जिससे किसी मकान की बेपर्दगी न होती हो तो उस ज़रूरत की बिना पर गर्मी के औकात में मस्जिद की छत पर नमाज़ पढ़ी जा सकती है।*
*📚 फतावा अजमलिया, सफ़हा- 395*
*📚 रमज़ान का तोहफा, सफा- 17*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*
*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म*
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*
*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*
*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*
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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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