अगर किसी ने रमज़ान के रोज़े की हालत में जानबूझ कर नमक थोड़ा सा खाया तो क़ज़ा भी और कफ्फारा भी वाजिब है और अगर नमक ज़्यादा खाया तो कफ्फारा वाजिब नहीं लेकिन क़ज़ा लाज़िम है सवाल पैदा होता है कम खाने से कफ्फारा वाजिब और ज़्यादा खाने से क्यों नही* 57

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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*

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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_10/09/1444_* 
*_रमज़ान मुबारक_* 
*_⛅ दिन; इतवार_*                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_02/04/2023_*     
*_अप्रैल_*
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*🧮 पोस्ट 56▪️*


*📝 सवाल :-*
*📇 अगर किसी ने रमज़ान के रोज़े की हालत में जानबूझ कर नमक थोड़ा सा खाया तो क़ज़ा भी और कफ्फारा भी वाजिब है और अगर नमक ज़्यादा खाया तो कफ्फारा वाजिब नहीं लेकिन क़ज़ा लाज़िम है सवाल पैदा होता है कम खाने से कफ्फारा वाजिब और ज़्यादा खाने से क्यों नही* 


*✍️ जवाब -:* 
*📇 वजह यह नहीं है कि कम खाया या ज़्यादा पहली बात शरीअत में हर चीज़ का कुछ क़ायदा क़ानून है जब तक वह न पाए जाए हुक्म नहीं लगाया जा सकता शरीअत में कफ्फारा वाजिब होने के लिए भी कुछ शर्तें है जिन में से एक शर्त यह है कि रोज़ा जिस अमल से तोड़ा जाए उस में लज़्ज़त मिले तब ही उस पर कफ्फारा वाजिब होगा और अगर कोई शख्स पत्थर, कंकर, मिट्टी, खा लिया या थूक में खून था और निगल लिया तो इस तरह तोड़ने से सिर्फ क़ज़ा लाज़िम है कफ्फारा नही*
*इसमें गौर करने की बात और सीखने वाली बात जो है वह यह है कि जिस चीज़ से इंसान को लज़्ज़त न मिले ऐसे चीज़ से रोज़ा तोड़ने पर कफ्फारा वाजिब नहीं होता और इसकी मिसाल पढ़े*
*अगर किसी ने कच्चे गोश्त से रोज़ा तोड़ा तो कफ्फारा वाजिब है लेकिन अगर कोई कच्चा ऐसा गोश्त जो सड़ा हुआ हो तो उस पर कफ्फारा वाजिब नही क्योंकि इंसान इसको खाने में लज़्ज़त महसूस नहीं करता बल्कि घिन मानता है खाने को ठीक इसी तरह अगर किसी ने थोड़ा नमक खाया तो उस में चूंकि लज़्ज़त महसूस होती है और खाने के फायदे भी है और किसी को घिन भी महसूस नहीं होगा लेकिन अगर किसी को एक कटोरा नमक दे दे और बोले खा लीजिए तो कोई भी नही खायेगा क्योंकि उस में लज़्ज़त महसूस नहीं होता है और लोग उसे खाने को पसंद भी नहीं करते*

*📚[बहारे शरीअत, हिस्सा- 5]*

*👉 नोट-: यूंही अगर कोई शख्स जानबूझ कर अपने हाथ के ज़रीए अपने ऊपर अकेले में गुस्ल फ़र्ज़ कर ले तो उस पर सिर्फ क़ज़ा है इस से गुनाह तो होगा लेकिन कफ्फारा नही होगा लेकिन अगर कोई अपने शौहर या बीवी के साथ हम्बिस्तरी (सोहबत) करे तो इस पर कफ्फारा वाजिब है* 
*वजह यह है कि पहली जो सूरत है उस में लज़्ज़त (कामिल) नहीं और जो दूसरी सूरत है उस में लज़्ज़त (कामिल) है यानी पहली सूरत पकड़ कम है और दूसरी सूरत में कामिल गलती है तो पकड़ भी सख्त है यानी कफ्फारा भी वाजिब है बात समझ में आ जाए इसलिए इतनी मिसाल दिया है और एक खास गौर वाली बात जिन सूरतों में क़ज़ा लाज़िम है जैसे अपने ऊपर गुस्ल फ़र्ज़ करना तो सिर्फ एक बार ही करने से है और अगर उसी अमल को दुबारा किया तो अब क़ज़ा के साथ साथ कफ्फारा भी वाजिब होगा उम्मीद करता हूं बात समझ में आ गई होगी।*

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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*

*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*



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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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