जिस शख्स की रूह निकलने वाली हो उस को यह हुक्म देना (कहना) कैसा है कि कलिमा शरीफ पढ़ो34

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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*

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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_16/08/1444_* 
*_शाअबानुल मुअज़्जम_* 
*_⛅ दिन; जुमेरात_*                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_09/03/2023_*     
*_मार्च_*
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*🧮 पोस्ट 33▪️*


*📝 सवाल-;*
*📇 जिस शख्स की रूह निकलने वाली हो उस को यह हुक्म देना (कहना) कैसा है कि कलिमा शरीफ पढ़ो*


*✍️ जवाब :-* 
*📇 जब मौत का वक़्त क़रीब आए और अलामतें पाई जाए तो सुन्नत यह है कि दाहिने करवट पर लिटा कर क़िब्ला की तरफ़ मुंह करें और यह भी जाइज़ है कि चित लिटाए और क़िब्ला की तरफ़ पांव करें कि यूं (ऐसे) भी क़िब्ला की तरफ़ मुंह हो जायेगा मगर इस सूरत में सर को क़दरे ऊंचा रखें और क़िब्ला की तरफ़ मुंह करना दुश्वार हो कि इस को तकलीफ़ होती हो तो जिस हालत पर है छोड़ दे जांकनी (दम निकलने के) वक़्त की हालत में जब तक रूह गले को न आई उसे तलक़ीन करें यानी उसके पास बुलंद आवाज़ से (कालिमा) पढ़े*
*اَشْھَدُ اَنْ لَّا اِلٰـهَ اِلَّا اللّٰه وَاَشْھَدُ اَنَّ مُحَمَّدًا رَّسُوْلُ اللّٰه*
*मगर उसे इसके कहने का हुक्म न करें जब उस ने कालिमा पढ़ लिए तो तलक़ीन मौक़ूफ कर (रोक) दे हां अगर कलिमा पढ़ने के बाद उसने कोई कोई बात की तो फिर तलक़ीन करें कि उसका आखिरी कलिमा हो* 
*لَا اِلٰـهَ اِلَّا اللّٰه مُحَمَّدٌ رَّسُوْلُ اللّٰه*
*तलक़ीन करने वाला कोई नेक शख्स हो ऐसा न हो जिसको उसकी मरने की खुशी हो और उसके पास उस वक़्त नेक और परहेज़गार लोगों का होना बहुत अच्छी बात है और उस वक़्त वाहआ सूरह यासीन शरीफ की तिलावत और खुशबू होना मुस्तहब है मसलन लोबान या अगबत्तियां सुलगा दे*

*👉 नोट; मौत का वक़्त बड़ा ही नाज़ुक होता है और उलमाए किराम इरशाद फरमाते हैं कि उस वक़्त शैत़ान उसके मरहुमो के शक्ल में आता है उसके पास उसके बाप की शक्ल में या मा के शक्ल में और कहता है कि बेटा मरने के बाद हमको पता चला कि इस्लाम सही मज़हब नही है लिहाज़ा तू इसाई धर्म क़बूल कर ले या हिन्दू धर्म क़बूल कर ले तो उस नाज़ुक वक़्त में इंसान को कलमा पढ़ने को न कहा जाए क्योंकि शैत़ान उसे बहकाता रहता है बल्कि उसके सामने कलमा पढ़ते रहे मगर उसे न बोले क्योंकि हो सकता है कि वो कुछ ऐसे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल कर दे जिससे ईमान ही खतरे में पड़ जाए मसलन कलिमा को ही इंकार कर दे तो और खतरा है बस एक बात आखिर में कहना चाहूंगा और एक फिक्र देना चाहूंगा कि जो तमाम उम्र शैत़ान की बात मानते रहे खुदा न खास्ता आखरी लम्हे में भी शैत़ान की बात न मान ले वरना ईमान ही ज़ाया हो जाएगा जो सारी ज़िन्दगी शैत़ान से लड़ाई में हारते रहे क्या वो आखरी जंग उससे जीत पाएंगे क्योंकि उसका असल मक़्सद ईमान बर्बाद करना ही है अल्लाह तआला हम सबको ईमान की हालत में मौत अ़ता फरमाए।*

 *📚 बहारे शरीअ़त हिस्सा 4 सफा 107, 108*

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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*

*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*



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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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