किसी बुज़ुर्ग की दरगाह पर जाकर इस तरह दुआ करना कैसा मसलन ऐ ख़्वाजा गरीब नवाज़ मै बे औलाद हूं मुझे औलाद दे दीजिए*36

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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*

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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_18/08/1444_* 
*_शाअबानुल मुअज़्जम_* 
*_⛅ दिन; हफ़्ता_*                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_11/03/2023_*     
*_मार्च_*
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*🧮 पोस्ट 35▪️*


*📝 सवाल-;*
*📇 किसी बुज़ुर्ग की दरगाह पर जाकर इस तरह दुआ करना कैसा मसलन ऐ ख़्वाजा गरीब नवाज़ मै बे औलाद हूं मुझे औलाद दे दीजिए*


*✍️ जवाब :-* 
*📇 अहले सुन्नत व जमात का अक़ीदा यह है के अल्लाह ने अपने मेहबूबाने बारगाह अम्बियाये किराम ऑलियाये इज़ाम को आलम में तसर्रुफ़ की क़ुदरत अता फरमाई है और यह अक़ीदा क़ुरान व अहादीस से साबित है क़ुरान मजीद में मज़कूर है कि अल्लाह ने हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को मुर्दे जिलाने मादर्ज़ाद अंधे को बिना करने और मिट्टी की मूर्ति में जान डालने की क़ुदरत अता फरमाई थी अल्लाह अपने मेहबूब के आंख, कान, हाथ, में ये कुव्वत अता फर्मा देता है की वो नज़दीक और दूर ज़ाहिर और छिपी हुई हर चीज़ को देखते हैं दूर ओ नज़दीक बुलंद व पस्त आवाज़ को सुनते हैं आलम में तसर्रुफ़ करते हैं यानी अल्लाह के इज़्न (इजाज़त) से जिसे जो चाहें अता कर दें जिससे जो चाहें छीन लें दूर व नज़दीक जहाँ चाहें हाज़िर हो जाएं इसीलिये गौसे आज़म फरमाते हैं कि किसी भी मुसीबत में जो मुझसे फरयाद करेगा मैं उसकी मुसीबत दूर कर दूंगा इन तफसीलो से ज़ाहिर हो गया कि किसी का किसी बुज़ुर्ग की मज़ार पर जा कर ये दरख्वास्त पेश करना कि मेरी फलां मुश्किल दूर कर दीजिए फलां हाजत पूरी कर दीजिए मुझे माल व दौलत दीजिये औलाद दीजिये बिला शुभह जाएज़ व दुरुस्त है कुफ्र व शिर्क होना तो दूर की बात है नाजायज़ व गुनाह भी नही अलबत्ता बेहतर यह है कि ये अर्ज़ करे की आप दुआ कीजिये कि अल्लाह मुझे ये अता फरमाए।*

*👉 नोट : सबक - हर इंसान को अपने अक़ीदे को दलाइल के साथ सीखना ज़रूरी है उसकी वजह ये है कि अगर कोई हमसे पूछ लें कि आप ये काम क्यों करते हो तो आपके पास जवाब रहना चाहिये जिससे सामने वाला मुतमईन हो जाए मगर यहाँ तो सूरते हाल ये है कि खुद सुन्नी को इतनी फुरसत नही है कि अहले सुन्नत के अक़ाइद को जिसे हम अपनाते हैं उसे दलील के साथ सीख सके हमने कुछ चीज़ों को बस रस्म बना लिया है उसके पीछे की दलील नही जानते कि हम क्यों इस काम को करते हैं और अगर कोई बदमज़हब हमसे इसके मुताल्लिक पूछ लें तो हम जवाब देने से आजिज़ आ जाते हैं इसलिए हमें हमारे अक़ाइद को दलील के साथ सीखना ज़रूरी है।*

 *📚 फतावा शारेह बुखारी जिल्द 2 सफा 163,164*

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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*

*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*



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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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