जाड़े के मौसम में ऊनी टोपी मोड़ कर पहनने का जो रिवाज है वो शरअ़न कफे सौब नहीं क्योंकि फुक़हा की इस्तिलाह में "कफे सौब" (कपड़ा मोड़ना) ये है कि आदत के ख़िलाफ़ कपड़ा को मोड़ कर इस्तिमाल किया जाए और यहाँ ऐसा नहीं है ये टोपी आम तौर पर मोड़ कर ही इस्तिमाल करने की आदत है बल्कि बहुत सी टोपियाँ यूँहीं मोड़ कर ही पहनी जाती हैं इसीलिए जाइज़ है और इस की वजह से नमाज़ में ज़र्रा बराबर भी कराहत ना आएगी आला हज़रत मुहद्दिसे बरेलवी رحمتہ اللہ تعالیٰ علیہ तहरीर फ़रमाते हैं कि किसी कपड़े को ऐसा ख़िलाफ़े आदत पहनना जिसे मुहज़्ज़ब आदमी मजमा या बाज़ार में ना कर सके और करे तो बे अदब ख़फ़ीफुल हरकात समझा जाए ये भी मकरूह है।*11

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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*

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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_19/07/1444_* 
*_रजब उल मुरज्जब_* 
*_⛅ दिन; हफ़्ता_*                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_11/02/2023_*     
*_फरवरी_*
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*🧮 पोस्ट 10▪️*


*📝 सवाल-;*
*📇 टोपी मोड़ कर नमाज़ पढ़ना कैसा है*


*✍️ जवाब-;*
*📇 जाड़े के मौसम में ऊनी टोपी मोड़ कर पहनने का जो रिवाज है वो शरअ़न कफे सौब नहीं क्योंकि फुक़हा की इस्तिलाह में "कफे सौब" (कपड़ा मोड़ना) ये है कि आदत के ख़िलाफ़ कपड़ा को मोड़ कर इस्तिमाल किया जाए और यहाँ ऐसा नहीं है ये टोपी आम तौर पर मोड़ कर ही इस्तिमाल करने की आदत है बल्कि बहुत सी टोपियाँ यूँहीं मोड़ कर ही पहनी जाती हैं इसीलिए जाइज़ है और इस की वजह से नमाज़ में ज़र्रा बराबर भी कराहत ना आएगी आला हज़रत मुहद्दिसे बरेलवी رحمتہ اللہ تعالیٰ علیہ तहरीर फ़रमाते हैं कि किसी कपड़े को ऐसा ख़िलाफ़े आदत पहनना जिसे मुहज़्ज़ब आदमी मजमा या बाज़ार में ना कर सके और करे तो बे अदब ख़फ़ीफुल हरकात समझा जाए ये भी मकरूह है।*

*📚 (فتاویٰ مرکز تربیت افتا، ج1 ص241)*

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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*

*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*



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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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