गैर सहाबा को रज़ियल्लाहु तआला अन्हू कहना कैसा है*41
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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_24/08/1444_*
*_शाअबानुल मुअज़्जम_*
*_⛅ दिन; जुम्आ मुबारक_*
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_17/03/2023_*
*_मार्च_*
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*🧮 पोस्ट 40▪️*
*📝 सवाल-;*
*📇 गैर सहाबा को रज़ियल्लाहु तआला अन्हू कहना कैसा है*
*✍️ जवाब :-*
*📇 बिलकुल गैर सहाबा के साथ भी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु लगा सकते हैं,ये उन किताबों की फेहरिस्त है जिसमें हमारे उलमा गैर सहाबा को भी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु लिखते हैं।*
*📚दुर्रे मुख्तार जिल्द 5 सफह 480*
*📚नसीमुर रियाज़ जिल्द 3 सफह 509*
*📚अशातुल लमात जिल्द 4 सफह 743*
*📚शामी जिल्द 1 सफह 35/36/37/42/*
*📚तफसीरे कबीर जिल्द 6 सफह 382*
*📚मिरक़ात शरह मिशकात जिल्द 1 सफह 3/27*
*📚तहतावी सफह 11*
*📚अहयाउल उलूम जिल्द 2 सफह 7*
*📚फतहुल बारी सफह 18*
*📚अखबारुल अख्यार सफह 15/16/18/21/*
*📚तफसीरे सावी जिल्द 1 सफह 3,*
*👉 ये तो बस चंद किताबें हैं वरना पूरा आलमे इस्लाम इसपर मुत्तफिक़ है कि गैर सहाबा के साथ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु का सीगा लगाया जा सकता है,बल्कि जो ऐतराज़ करते हैं खुद उन बद अक़ीदों ने भी मोलवी क़ासिम नानौतवी और रशीद अहमद गंगोही को अपनी किताब में रज़ियल्लाहु तआला अन्हु लिखा है।*
*📚तज़किरतुर रशीद जिल्द 1 सफह 28*
*👉 हाँ चूंकि ये लफ्ज़ काफी मुअज़्ज़ज़ है लिहाज़ा हर किसी के साथ ना इस्तेमाल किया जाये सिर्फ बड़े बड़े उलमा फुक़हा वलियों के साथ ही इस्तेमाल करें*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*
*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म*
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*
*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*
*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*
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*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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