हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह आप का पहला फतवा कौन सा था156

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴



*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*

*~_____________________________________~*
*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_13/01/1445_* 
*_मोहर्रमुल हराम_* 
*_⛅ दिन; मंगल_*                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                             
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_01/08/2023_*     
*_अगस्त_*
*~_____________________________________~*

*🧮 पोस्ट 161▪️*


*📝 सवाल :-*
*📇 हुज़ुर मुफ़्ती ए आज़म् हिंद मुस्तफ़ा रज़ा खान नूरी रहमतुल्लाह अलैह आप का पहला फतवा कौन सा था* 


*✍️ जवाब -:*
*📇 आप ने सिर्फ तेहरा 13 साल की क़लील उमर में रज़ाअत का मसला लिखा बादे फरागत आला हज़रत रहमतुल्लाह अलैह की हयाते तय्यबा में ही फतवा नवेसी का काम सौंप दिया गया था जिस की इब्तिदा यानि शुरू का वाक़िअ बड़ा दिल चस्प है हज़रत अल्लामा ज़फरुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह व हज़रत मौलाना सय्यद अब्दुर रशीद साहब रहीमा हुमुल्लाह दारुल इफ्ता में काम करते थे अभी आप की नो उमरी का आलम था एक दिन दारुल इफ्ता में पहुंचे तो देखा के हज़रत अल्लामा ज़फरुद्दीन बिहारी रहमतुल्लाह अलैह फतवा लिख रहे थे मराजे के लिए फतावा रज़विया अलमारी से निकलने लगे इस पर हुज़ूर मुफ्तिए आज़म हिन्द रहमतुल्लाह अलैह ने फ़रमाया क्या फतावा रज़विया देख कर जवाब लिखते हैं मौलाना ने फ़रमाया अच्छा तुम बगैर देखो लिखदो तो जाने हज़रत ने कमल बर्दाश्त जवाब लिख दिया जो रज़ाअत का मसला था ये आप का पहला फतवा था जो अपनी ज़िन्दगी में क़लम बंद फ़रमाया इसलाहो तसही के लिए वो जवाब इमामे अहले सुन्नत की ख़िदमात में पेश किया गया सेहत जवाब पर इमामे अहले सुन्नत बहुत खुश हुए और अल जवाब बी ओनिल्लाहिल अज़ीज़िल वह्हाब लिख कर दस्त खत फरमाए यही नहीं बल्के इनआम के तौर पर अबुल बरकात मुहीयुद्दीन जिलानी आले रहमान मुहम्मद उर्फ़ मुहम्मद मुस्तफा रज़ा की मुहर मौलाना हाफ़िज़ यक़ीनुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह के भाई से बनवा कर अता फ़रमाई ये वाक़िअ 1328 हिजरी का है बाराह 12 साल तक वालिद माजिद की ज़िन्दगी में फतवा नवेसी करते रहे जिस का सिसिला आखरी उमर तक जारी रहा ये मुहर हज़रत के तीसरे हज मौके पर जद्दा में दीगर सामानो के साथ गम हो गई*

________________________
________________________

*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*

*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*



🖼🖼🖼🖼🖼🖼🖼🖼🖼🖼
*👏🏁 गदा ए फकीर रज़वी कादरी हनफी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
https://chat.whatsapp.com/ERGah4bKksUIHdlxfhJuBz

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अप्रैल फूल किस लिए मनाते हैं*5️⃣0️⃣

क्या अहले-सुन्नत-वल-जमाअत (बरेलवी) का दिगर बदमज़हब, वहाबी, देवबंदी, फिर्कों से सिर्फ़ दरुद, सलाम, फ़ातिहा, का झगड़ा है*4️⃣7️⃣

एक शख़्स कलमा ना पढ़ने के बावुजूद मुसलमान हो गया उसकी क्या सूरत है*4️⃣8️⃣