जब चारों इमाम में इख्तिलाफ है तो चारों हक़ पर कैसे हैं*190
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*🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ*
*🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ*
*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*_🌙 इस्लामी तारीख_*
*_19/02/1445_*
*_सफ़र उल मुज़फ्फर_*
*_⛅ दिन; बुध_*
*_🗓️ अंग्रेजी तारीख_*
*_06/09/2023_*
*_सितंम्बर_*
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*🧮 पोस्ट 197▪️*
*📝 सवाल :-*
*📇 जब चारों इमाम में इख्तिलाफ है तो चारों हक़ पर कैसे हैं*
*✍️ जवाब :-*
*📇 पहले आप समझ लें कि मसायल के 4 इमाम हैं,हज़रते इमामे आज़म हज़रते इमाम शाफयी,हज़रते इमाम मालिक और हज़रते इमाम अहमद बिन ह़म्बल,ये चारों ही अक़ायद पर मुत्तफिक़ हैं इख्तिलाफ है तो फुरु में,इस ज़माने में हक़ इन्हीं चारों में से किसी एक की पैरवी में है और जो इन से अलग हुआ वो गुमराह बे दीन है आपके सवाल का जवाब ये है कि चारों ही इख्तिलाफ के बावजूद हक़ पर कैसे हैं,इसके लिए ये ह़दीसे पाक पढ़ीये बनी क़ुरैज़ा पर जल्द पहुंचने की गर्ज़ से हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने अपने सहाबियों में ये ऐलान करवाया कि हम असर की नमाज़ बनी क़ुरैज़ा पहुँच कर पढ़ेंगे,सभी ह़ज़रात जुहर पढ़कर निकले और सफर करते रहे यहाँ तक कि असर का वक्त बहुत थोड़ा रह गया,तो कुछ सहाबा ऐ इकराम ने नमाज़ पढ़नी चाही तो कुछ नें मना किया कि हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम का कहना है कि नमाज़ वहीं पहुँच कर पढ़ेंगे इसपर वो सहाबा कहने लगे कि हुज़ूर का कहना बिलकुल हक़ है मगर उनहोंने ये नहीं कहा कि अगर नमाज़ का वक्त निकल जाये तब भी मत पढ़ना तो वो सहाबा नमाज़ पढ़े और कुछ नहीं पढ़े जब हुज़ूर बनी क़ुरैज़ा पहुँच गए तो नमाज़े क़ज़ा पढ़ी गयी फिर हुज़ूर के सामने उन सहाबियों का तज़किरा हुआ तो आपने फरमाया की जिनहोंने पहले पढ़ ली उनको सवाब और जिनहोंने अब मेरे साथ पढ़ी उनको दो गुना सवाब,देखिये यहाँ नमाज़ अदा करने पर भी सवाब मिल रहा है और क़ज़ा करने पर भी सवाब मिल रहा है तो बस इसी तरह चारों इमाम मुजतहिद थे जिसने सही मस्अला अपने हिसाब से निकाला तो उसे दो गुना सवाब और जिसने मस्अला समझने में गलती की तो उस गलती पर भी एक गुना सवाब,कियोंकि मुजतहिद की खता माफ है और ये इख्तिलाफ उम्मत के लिए रह़मत इस तरह है कि किसी को दीन की किसी बात पर अमल करने का मौक़ा मिल रहा है किसी को किसी दूसरी बात पर कियोंकि शरीयत एक चमन है और चमन हर तरह के फूलों से बनता है कहीं गुलाब तो कहीं चमेली कहीं कहीं जूही तो कहीं नरगिस और अवाम को इख्तिलाफ में पडने को इसलिए मना किया जाता है कि वो इल्म तो रखते नहीं हैं तो वो किसी बात का इंकार कर बैठेंगे जो उनकी आखिरत खराब कर देगा,लिहाज़ा यही कहा जाता है कि अपने इमाम की पैरवी करो और इख्तिलाफ में ना पड़ो।*
*📚 बुखारी शरीफ जिल्द 1 किताबुल जिहाद*
*📚 मुस्लिम शरीफ जिल्द 2 सफह 95*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*
*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म*
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*
*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदके तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*
*🔛((((( अगली पोस्ट जल्द )))))*
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*👏🏁 गदा ए फ़कीर रज़वी वारसी चिश्ती क़ादरी हनफ़ी बरेलवी 🔴* *جزاک اللہ خیر*
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