सुफिय-ए किराम, और दुआ़ मांगने वाले दुआओं के अव्वल (शुरू) में अल्लाहुम्मा क्यों लगाते है अल्लाह के साथ मीम कैसी और अगर कहा जाए कि ये लफ़्ज़ असल में या अल्लाह था या के बदले में लगाई है तो बजाए मीन के और कोई हर्फ क्यों न लगाया (यानी मीम ही क्यों)*0️⃣2️⃣

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*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*🧮 पोस्ट 02▪️*

*📝 सवाल-;*
*📇 सुफिय-ए किराम, और दुआ़ मांगने वाले दुआओं के अव्वल (शुरू) में अल्लाहुम्मा क्यों लगाते है अल्लाह के साथ मीम कैसी और अगर कहा जाए कि ये लफ़्ज़ असल में या अल्लाह था या के बदले में लगाई है तो बजाए मीन के और कोई हर्फ क्यों न लगाया (यानी मीम ही क्यों)*

*✍️ जवाब-;*
*📇 इस लिए कि मीम रब के बीस नामों में आती है जैसे मोमिन, मुहैमिन, मालिक, मुक़्तदिर, करीम, रहमान, रहीम, वगैरा लिहाज़ा जो कोई अल्लाह से साथ लफ़्ज़ मीम लगा कर पुकारे तो गोया उसने रब को बीस नामों से याद किया और हर नाम के असरात मुख़्तलिफ़ हैं लिहाज़ा तमाम असरात हासिल हुए और हुज़ूर सल्लल्लाहु तआ़ला अ़लैहि वसल्लम के नाम मुबारक में भी मीम आती है जैसे मुहम्मद, अहमद, मुस्तफ़ा, मुज़तबा, वग़ैरा, लिहाज़ा अल्लाह में अल्लाह का नाम और मुहम्मद की मीम आ गई गोया दुआ़ में हुज़ूर सल्लल्लाहु तआ़ला अ़लैहि वसल्लम का वसीला भी हासिल हो गया इसलिए दुआओं में अल्लाहुम्मा लगाते हैं*

*📚 हम से पूछिए सफा 34*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*


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