रमज़ान में वित्र की नमाज़ जमाअत से पढ़ी जाती है, तो ऐसे में मुक़्तदी को दुआए कुनूत इमाम के पीछे पढ़ने का क्या हुक्म है*2️⃣5️⃣

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴


*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
*~_____________________________________~*

*🧮 पोस्ट 25▪️*

*📝 सवाल-;*
*📇 रमज़ान में वित्र की नमाज़ जमाअत से पढ़ी जाती है, तो ऐसे में मुक़्तदी को दुआए कुनूत इमाम के पीछे पढ़ने का क्या हुक्म है*

*✍️ जवाब-:*
*📇 मुक़्तदी को दुआए कुनूत पढ़ना वाजिब है, चाहे वो जमाअत से पढ़े या तन्हा पढ़े, जैसा कि हुज़ूर सदरुश शरीअह अलैहिर्रहमा फरमाते हैं कि वित्र में दुआए कुनूत का पढ़ना वाजिब है और आहिस्ता पढ़े अब वह चाहे इमाम हो या मुंफरिद (अकेले नमाज़ पढ़ने वाला) हो या मुक़्तदी हो अदा हो या क़ज़ा रमज़ान में हो या और दिनों में और आगे तहरीर फरमाते हैं कि कुनूत वित्र में मुक़्तदी इमाम की मुताबअत करे (यानी इमाम के साथ कुनूत पढ़े) अगर मुक़्तदी कुनूत से फारिग ना हुवा था कि इमाम रुकूअ में चला गया तो मुक़्तदी इमाम का साथ दे (यानी मुक़्तदी भी इमाम के साथ रुकूअ में चला जाए) और अगर इमाम ने कुनूत ना पढ़ी और रुकूअ में चला गया और मुक़्तदी ने अभी कुछ ना पढ़ा, तो मुक़्तदी को अगर रुकूअ फौत होने (छूट जाने) का अंदेशा हो जब तो रुकूअ करे वरना कुनूत पढ़ कर रुकूअ में जाए (अलबत्ता इमाम भूल कर के बगैर दुआए कुनूत पढ़े रुकूअ में चला गया तो सजदा सहव लाज़िम होगा)*

*📚 फतावा मसाइले शरईय्या जिल्द 3 सफ़ह 177*
*📚 बहारे शरीअत हिस्सा 4 वित्र का बयान*

*👉नोट:- खुलासा यह कि दुआए कुनूत का हर हाल में हर किसी को पढ़ना वाजिब है, चाहे इमाम हो या मुक़्तदी हो रमज़ान हो या ना हो औरत हो या मर्द हो, हां अगर मुक़्तदी हो तो रुकूअ छूटने का डर हो तो मुकम्मल किए बगैर रुकूअ में जाए और इमाम का साथ दे*
*दुआए कुनूत यह है:*
*اَللّٰھُمَّ اِنَّا نَسْتَعِیْنُکَ وَ نَسْتَغْفِرُکَ وَ نُؤْمِنُ بِکَ وَ نَتَوَکَّلُ عَلَیْکَ وَنُثْنِیْ عَلَیْکَ الْخَیْرَ کُلَّہٗ وَنَشْکُرُکَ وَلَا نَکْفُرُکَ وَ نَخْلَعُ وَنَتْرُکُ مَنْ یَّفْجُرُکَ . اَللّٰھُمَّ اِیَّاکَ نَعْبُدُ وَلَکَ نُصَلِّیْ وَنَسْجُدُ وَاِلَیْکَ نَسْعٰی وَنَحْفِدُ وَنَرْجُوْ رَحْمَتَکَ وَنَخْشٰی عَذَابَکَ اِنَّ عَذَابَکَ بِالْکُفَّارِ مُلْحِقٌ*
________________________
________________________
*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*


👑👑👑👑👑👑👑👑👑👑
*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
https://chat.whatsapp.com/I3NIYUqgOmvBN2r8fDzqIH

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

अप्रैल फूल किस लिए मनाते हैं*5️⃣0️⃣

क्या अहले-सुन्नत-वल-जमाअत (बरेलवी) का दिगर बदमज़हब, वहाबी, देवबंदी, फिर्कों से सिर्फ़ दरुद, सलाम, फ़ातिहा, का झगड़ा है*4️⃣7️⃣

एक शख़्स कलमा ना पढ़ने के बावुजूद मुसलमान हो गया उसकी क्या सूरत है*4️⃣8️⃣