किसी रोज़ादार को रोज़ा इफ़्त़ार कराना कैसा और मौसम के खराब होने की सूरत में इफ़्तार में ज़रा ताख़ीर करना कैसा*3️⃣2️⃣
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*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*🧮 पोस्ट 32▪️*
*📝 सवाल-;*
*📇 किसी रोज़ादार को रोज़ा इफ़्त़ार कराना कैसा और मौसम के खराब होने की सूरत में इफ़्तार में ज़रा ताख़ीर करना कैसा*
*✍️ जवाब-:*
*📇 अल्लाह के रसूल ﷺ ने इरशाद फ़रमाया जिसने किसी रोज़ादार को रोज़ा इफ़्त़ार कराया तो उस रोज़ा इफ़्त़ार कराने वाले को भी उसके बराबर सवाब मिलेगा और रोज़ादार के सवाब में कमी भी नही होगी।*
*सहरी खाना मुस्तहिक़ है अगर्चे भूक बिल्कुल न हो दो तीन खजूरें या थोड़े से पानी से भी सहरी खाने की फज़ीलत हासिल हो जाती है*
*सहरी देर से खाना अफ़ज़ल है अलबत्ता इतनी देर भी न हो कि सुबह का अंदेशा होने लगे और रोज़ा मशकूक (शको शुबा) हो जाए*
*किसी ने सहरी जल्दी खाली और चाय वगैरा सहरी तक पिता रहा तो भी देर तक रुके सहरी खाने का सवाब मिल गया*
*सहरी के लिए आंख न खुली हो तो सहरी खाए बगैर रोज़ा रख लेना चाहिए, रोज़ा छोड़ना कबीरा गुनाह है*
*सहरी के लिए आंख देर से खुली और रात के बाक़ी होने के ख्याल से सहरी खाली, बाद में मालूम हुवा कि सुबह हो चुकी थी तो रोज़ा नहीं हुआ, क़ज़ा अदा करे कफ्फारा वाजिब नहीं है*
*सहरी खाते हुवे वक्त खत्म हो जाए तो खाना छोड़ दिया जाए, अज़ान के खत्म होने या हय्या अलस्सलाह तक खाते रहने को दुरुस्त समझना जायज़ नहीं है, इस से रोज़ा नहीं होता*
*सुबह होने के शुबा के बाद खाना, खाना मकरूह है, अगर खा लिया बाद में मालूम हुवा कि सुबह हो चुकी थी तो क़जा़ वाजिब है,*
*सूरज के यक़ीनी गुरूब होने जाने के बाद इफ़्त़ार में ताखीर (यानी देर, लेट, करना) मकरूह है, इफ़्त़ार में ताजील (जल्दी करना) मुस्तहब है*
*मौसम के खराब होने की सूरत में इफ़्त़ार में ज़रा ताखीर (यानी देर, लेट) करना बेहतर है, ताकि गुरुबे आफताब का यक़ीन हो जाए,*
*खजूर या छुहारे से रोज़ा खोलना बेहतर है, मीठी चीज़ या पानी से भी इफ़्त़ार किया जा सकता है*
*📚 सुनन इब्ने माआजा जिल्द 1, सहीह-1746*
*📚 रमज़ान उल मुबारक फज़ाइल व मसाइल सफ़ह 07*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*
*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म*
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*
*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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