ईदुल फितर के मौक़े पर वालिदैन की तरफ से छोटे बच्चों को ईदी दी जाती है, इसी तरह बच्चे जब किसी रिश्तेदार के घर जाते हैं तो वहां भी बच्चों को ईदी मिलती है4️⃣1️⃣
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*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*🧮 पोस्ट 41▪️*
*📝 सवाल-;*
*📇 ईदुल फितर के मौक़े पर वालिदैन की तरफ से छोटे बच्चों को ईदी दी जाती है, इसी तरह बच्चे जब किसी रिश्तेदार के घर जाते हैं तो वहां भी बच्चों को ईदी मिलती है, और फिर उन रिश्तेदारों के बच्चे जब इन्हीं के घर आते हैं तो वालिदैन बच्चों की वही ईदी में से रिश्तेदारों के बच्चों को ईदी दे देते हैं, क्या बच्चों की ईदी में से रिश्तेदारों के बच्चों को ईदी दे सकते हैं या नहीं, और वालिदैन इसे अपने इस्तेमाल में ला सकते हैं या नहीं, नीज ईदी और बच्चों का सामान जो खिलौने वगैरह होते हैं वो किस के मिल्क (क़ब्ज़े में) होंगे बच्चों की या वालिदैन की*
*✍️ जवाब-:*
*📇 सूरत-ए-मसऊला में बच्चों को जो ईदी मिलती है वो बच्चों की मिल्क होती है, वालिदैन उसमें से रिश्तेदारों के बच्चों को ईदी नहीं दे सकते और वालिदैन खुद भी उन पैसों को अपने लिए इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं अगर वालिदैन फ़क़ीर हों और उन पैसों की हाजत हो तो बक़दरे ज़रूरत उसमें से इस्तेमाल कर सकते हैं, इसके इलावा उन्हें भी इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं है नीज़ ईदी या बच्चों की सालगिरा में जो लिफाफे व तहाइफ (Gifts) बच्चों को मिलते हैं उसके मुतअल्लिक अगर देने वाला सराहतन कह दे कि फुलां के लिए हैं तो जिसके लिए कहा गया वह उसी के लिए होंगे, वरना जिन चीजों के मुतअल्लिक मालूम हो कि वो बच्चे के लिए हैं मसलन छोटे कपड़े, खिलौने वगैरह तो वह बच्चे के लिए होंगे वरना वालिदैन के लिए, फिर अगर देने वाला बाप के रिश्तेदारों या दोस्तों में से है तो वह बाप के लिए होंगे और अगर मां के रिश्तेदारों या जानने वालों में से है तो वह मां के लिए होंगे अलगर्ज़ उर्फ व आदत पर एतिबार किया जाएगा, अगर बाप के खानदान की जानिब से ज़नाना (ख़्वातीन) चीजें तहाइफ मसलन कपड़े वगैरह आएं तो वो औरत के लिए होंगे, और औरत के खानदान की तरफ से मर्दाना इस्तेमाल की चीजें आएं तो वो मर्दों के लिए होंगे, और ऐसी चीजें जो मर्द व औरत दोनों इस्तेमाल करते हों तो जिसके खानदान या अज़ीज़ों (जान पहचान) की जानिब से हो उसी के लिए होंगी अलबत्ता ईदी की इतनी बड़ी रक़म जिसके बारे में मालूम है कि इतनी रक़म बच्चों को नहीं बल्कि उनके वालिदैन को ही दी जाती है, तो वो बच्चों की मिल्क नहीं होगी बल्कि ऊपर की तफसील के मुताबिक़ मां के खानदान या रिश्तेदार पहचान वालों की तरफ से हो तो मां की होगी या बाप के खानदान रिश्तेदार पहचान वालों की तरफ से हो तो बाप की होगी*
*📚 रमज़ान के फ़तावा सफ़ह 101, 102*
*👉 नोट-: खुलासा यह है कि बच्चों की ईदी पैसा वगैर किसी मजबूरी के हरगिज़ ना की जाए, यानी रखने या उसी पर इस्तेमाल करने के लिए ले ली जाए, लेकिन अपने जाती काम में इस्तेमाल न की जाए, न दूसरे बच्चों को दी जाए, हां अगर मां बाप में से कोई फ़कीर हो और कोई मजबूरी हो कि उस पैसे के इलावा कोई पैसे ना हो तो इस्तेमाल जरूरत जितना कर सकते हैं उस से ज़्यादा नहीं, और अगर बड़ी रक़म हो तो बच्चों की नहीं होती बल्कि जिसके खानदान या पहचान वाले दिए होंगे उसी के मिल्क (मालिक) होंगे*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*
*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म*
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*
*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*
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*🏁 MASLAKE AALA HAZRAT 🔴*
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