अपने बच्चों को दीनी तालीम दिलाए बगैर सिर्फ दुनियावी तालीम के लिए प्राइमरी स्कूल भेजना कैसा*6️⃣1️⃣

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*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*🧮 पोस्ट 61▪️*

*📝 सवाल-;*
*📇 अपने बच्चों को दीनी तालीम दिलाए बगैर सिर्फ दुनियावी तालीम के लिए प्राइमरी स्कूल भेजना कैसा*

*✍️ जवाब-:*
*📇 इल्मुल अक़ाइद का हासिल करना हर मुसलमान मर्द व औरत पर फ़र्ज़ है फिर ज़रूरत के मसाइल जब नमाज़ पढ़ना उस पर फ़र्ज़ हो जाए तो नमाज़ के मसाइल वगैरा जैसा कि हदीसे पाक में आया कि इल्म का हासिल करना हर मुसलमान मर्द व औरत पर फ़र्ज़ है और यहां हदीस में इल्म से मुराद इल्मुल अक़ाइद और ज़रूरियाते दीन के मसाइल का हुक्म है और आला हज़रत अलैहिर्रहमा इरशाद फ़रमाते हैं कि गैरे दीन की ऐसी तालीम के तालीम ज़रूरियाते दीन को रोके मुतलकन हराम है फ़ारसी हो या अंग्रेज़ी या हिंदी नीज़ इन बातों की तालीम जो अक़ाइदे इस्लाम के खिलाफ़ हैं उनका पढ़ना पढ़ाना हराम है जो लोग अपने बच्चो को दीनी तालीम दिलाये बगैर सिर्फ दुनियावी तालीम के लिए प्राइमरी स्कूलों में भेजते हैं हत्ता के बच्चो को कलिमा शरीफ़ भी याद नही कराते तो वो लोग सख़्त गुनहगार और बच्चों के बदख्वाह हैं उन पर लाज़िम है कि पहले अपने बच्चों को बक़दरे फ़र्ज़ दीनी तालीम दिलवाएं फिर अगर चाहें तो अंग्रेज़ी हिंदी ज़बान सीखने के लिए स्कूल भेजें दौरे जदीद में हर दीनी मक़ातिब व मदारिस वालों को चाहिए की दीनी तालीम के साथ साथ दुनियावी तालीम भी इंतेज़ाम करें ताकि बच्चों को मदारिस छोड़ कर गैर क़ौम के पास जाना ही न पड़े*

*📚 फैज़ाने आला हज़रत सफ़ह 104,105* 
*📚 फ़तावा रज़विया जिल्द 9 सफ़ह 423* 
*📚 फ़तावा शारेह बुखारी जिल्द 2 सफ़ह 590*

👉 नोट :- *आज के दौर में कोई भी ये नही सोचता कि जिन स्कूलों में हम अपने बच्चों को भेज रहे हैं वहां पर उन्हें क्या तालीम मिल रही है आज के ज़्यादातर स्कूलों में ऐसी चीज़ें सिखाई जा रही है जो हमारे इस्लाम के अक़ाइद के ख़िलाफ़ हैं मिसाल धरती का घूमना इंसान की पैदाइश बंदर से वंदे मातरम जैसे कुफ़्रिया गीत बुलवाए जाते हैं यहाँ पर माँ बाप की ज़िम्मेदारी है कि वो अपने बच्चों को शुरू से ही इस्लाम के बुनियादी अक़ाइद सिखाते रहें ताकि वो स्कूल में जा कर इन सब ख़ुराफ़ात से बच सकें पहले अपने बच्चों को मदरसे में दाख़िला करवाएं फिर स्कूल में मगर यहां तो सूरते हाल यह है कि सारी जिंदगी गुज़र जाती है और मदरसे में जाने की तौफ़ीक़ नहीं होती इल्म हासिल करने की तौफ़ीक़ नही होती मेरे भाइयों हम अल्ह़म्दुलिल्लाह सुन्नी हैं उसके बावजूद हम पर इल्म सीखना फ़र्ज़ है वरना ईमान बचाना उतना ही मुश्किल होगा जिस तरह से जंग में एक सिपाही का बिना हथियार के अपनी जान बचाना तो पहले खुद सीखिए और साथ ही साथ मे अपने बच्चों को भी सिखाइये।*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*


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