काफ़िर और मुशरिक को हमेशा जहन्नम में रखना ज़ुल्म है सज़ा जुर्म के मुताबिक़ होनी चाहिये न कि हमेशा ये बोलना कैसा है*6️⃣2️⃣

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*🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ*
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*🧮 पोस्ट 62▪️*

*📝 सवाल-;*
*📇 काफ़िर और मुशरिक को हमेशा जहन्नम में रखना ज़ुल्म है सज़ा जुर्म के मुताबिक़ होनी चाहिये न कि हमेशा ये बोलना कैसा है*

*✍️ जवाब-:*
*📇 क़ानून से ज़्यादा सज़ा देना वाक़ई ज़ुल्म है और क़ानूनी सज़ाएं इंसाफ़, रब का क़ानून यह है कि हुकूमते इलाहिया के बागी यानी काफ़िर व मुशरिक की सज़ा हमेशा जहन्नम है, लिहाज़ा यह हमेशगी ज़ुल्म नहीं, चोर आधे घंटे में चोरी करता है और दो चार दिन में चोरी का माल खा पी लेता है, मगर इसको सात या दस साल की जेल होती है, डाकू को उम्र क़ैद होती है, वहां कोई नहीं कहता कि उसने एक घंटे में ज़ुर्म किया उसको एक ही घंटे जेल में रखो बल्कि क़ानून ने चूंकि उसकी सज़ा यही रखी है लिहाज़ा यह ऐन (असल) इंसाफ है, ज़ुल्म नहीं है, हां जो हाकिम क़ानून से ज़्यादा सज़ा दे वह ज़ुल्म है, दूसरे यह कि काफ़िर ने अल्लाह की बे इंतेहा ने'मतें खाकर बे इंतेहा बग़ावत व नाफ़रमानी की इसलिये इसको बे इंतेहा सज़ा दी जाए, आज की मुल्की क़ानून में बाग़ी और मुल्क से ग़द्दारी करने की सज़ा उम्र क़ैद या फांसी है मगर चूंकि वहां मौत नहीं इसलिये इसकी सज़ा की इंतेहा नहीं और यहां दुनिया में मौत इस ज़िन्दगी की इंतेहा हैं इसलिए यह सज़ा उसकी इंतेहा है*

*📚 हम से पूछिए सफ़ा 61*
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*💉 अपनी औलादो में आला हज़रत की मोहब्बत डाल दो वरना बड़े होकर अपने मां बाप की कब्र पर जाना भी 😝शिर्क समझेंगे।*

*💓 हैं पुश्त-पनाह ग़ौषे आज़म​* 
*क्युं डरते हो तुम रज़ा किसी से*

*👏 अल्लाह हमे अपने महबूब हुज़ूर सल्लल्लाहों अलैहि वसल्लम के सदक़े तुफैल इल्मे दीन सीखने समझने और अमल करने की तौफ़िक अता करे।*
*▪ امیــــــن ▪*


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